उत्तराखंड: राजकीय कर्मचारियों को बेहतर और सुरक्षित आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से जर्जर और खराब स्थिति में पड़े सरकारी आवासों की पहचान कर उनके पुनर्निर्माण और मरम्मत की व्यापक योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। राज्य संपत्ति विभाग के अनुसार कई सरकारी भवन वर्षों से मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुके हैं, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब ऐसे सभी आवासों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा और उनकी स्थिति के आधार पर जहां संभव होगा वहां मरम्मत की जाएगी, जबकि अत्यधिक क्षतिग्रस्त भवनों को ध्वस्त कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए आवास बनाए जाएंगे।
सरकार की योजना है कि जहां-जहां विभागीय भूमि उपलब्ध है, वहां नए आवासीय परिसरों का निर्माण किया जाए, ताकि कर्मचारियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा मिल सके। आधुनिक सुविधाओं से लैस इन आवासों से कर्मचारियों के कार्य परिवेश में सुधार होने के साथ उनकी कार्यक्षमता बढ़ने की भी उम्मीद है।
देहरादून के रेसकोर्स क्षेत्र स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में नए आवास निर्माण का प्रस्ताव भी इसी योजना का हिस्सा है। यहां जर्जर भवनों को हटाकर खाली हुई भूमि पर श्रेणी-2 के 31 नए आवास बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त अन्य उपलब्ध भूमि पर श्रेणी-4 के 10 आवासों के निर्माण की योजना भी तैयार की गई है। इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है, जिससे कर्मचारियों को आधुनिक और बेहतर रहने की सुविधा मिल सकेगी।
राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस योजना को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। जर्जर आवासों की पहचान कर उनकी मरम्मत और पुनर्निर्माण के साथ-साथ उपलब्ध भूमि पर नए आधुनिक आवासों का निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को बेहतर जीवन और कार्य वातावरण मिल सके।

