उत्तराखंड: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष और तनाव का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद, देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी करने की घोषणा कर दी है। यह बढ़ी हुई दरें गुरुवार से लागू हो गई हैं।
आम जनता पर चौतरफा मार
ईंधन की कीमतों में हुए इस बड़े इजाफे का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका एक बड़ा ‘डोमिनो इफेक्ट’ पूरी अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा:
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महंगी होगी माल ढुलाई: डीजल के दाम बढ़ने से देश भर में हर तरह की सामग्री की ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) महंगी हो जाएगी।
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थाली पर असर: ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने का सीधा असर फल, सब्जियां, दूध और अन्य जरूरी खाने-पीने की वस्तुओं पर पड़ेगा, जिससे रिटेल महंगाई में उछाल आने की पूरी आशंका है।
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उद्योगों के लिए बढ़ी चुनौती: माल ढुलाई महंगी होने के कारण फैक्ट्रियों तक पहुँचने वाला कच्चा माल भी महंगा हो जाएगा, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ेगी।
अभी और लग सकता है झटका
चिंता की बात यह है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से की गई यह बढ़ोतरी अंतिम नहीं मानी जा रही है।
विशेषज्ञों और बाजार के सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के मौजूदा दामों को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की वास्तविक उत्पादन लागत (Production Cost) और देश में उनकी बिक्री लागत (Selling Cost) के बीच का अंतर यानी अंडर-रिकवरी अभी भी काफी ज्यादा है। इस घाटे को पाटने के लिए आने वाले दिनों में तेल कंपनियां कीमतों में और भी इजाफा कर सकती हैं।
पश्चिम एशिया में अगर तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आम भारतीयों को महंगाई के मोर्चे पर और भी कड़े झटके झेलने पड़ सकते हैं।

