ऋषिकेश | संवाददाता ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 10 में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक बिजली के पोल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पोल पर लटक रहे तारों के जाल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया। स्थानीय निवासियों की तत्परता और सूचना के बाद समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी जनहानि और संपत्ति का नुकसान होने से बच गया।
शॉर्ट सर्किट और तारों का ‘जाल’ बनी वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण पोल पर लटक रहे केबल और इंटरनेट के तारों के भारी गुच्छे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि:
- केबल ऑपरेटर और इंटरनेट कंपनियां बिजली के पोलों पर अवैध और अव्यवस्थित तरीके से तार छोड़ देती हैं।
- इन तारों के बोझ और आपस में रगड़ खाने से शॉर्ट सर्किट की स्थिति पैदा हुई।
- घनी आबादी वाला क्षेत्र होने के कारण आग लगने से आसपास की दुकानों और घरों में दहशत फैल गई।
पार्षद ने प्रशासन को घेरा: “चेतावनी के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई”
वार्ड नंबर 10 के पार्षद आंसू डंग ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि वह कई बार नगर निगम की बोर्ड बैठक में इस गंभीर मुद्दे को उठा चुके हैं।
”मैंने बार-बार प्रस्ताव रखा था कि बिजली के पोलों पर फैले इन जानलेवा तारों के गुच्छों को हटाया जाए और केबल लाइन को व्यवस्थित किया जाए। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण आज यह हादसा हुआ। यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ है।” — आंसू डंग, पार्षद
जनता में भारी आक्रोश
क्षेत्रीय नागरिकों ने संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के लगभग हर वार्ड में बिजली के पोल तारों के बोझ से दबे हुए हैं, जो कभी भी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकते हैं।
मुख्य मांगें:
- शहरभर में बिजली के पोलों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट किया जाए।
- अवैध और लटक रहे इंटरनेट व केबल तारों को तुरंत हटाया जाए।
- लापरवाह कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने ऋषिकेश के बुनियादी ढांचे और बिजली सुरक्षा प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी है।

