ऋषिकेश। स्थानीय सरकारी उप जिला चिकित्सालय में पिछले एक हफ्ते से शवगृह (मर्च्युरी) का फ्रीजर खराब पड़ा है। इस तकनीकी खराबी के कारण सड़क दुर्घटनाओं और संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले लोगों के शवों को सुरक्षित रखने में भारी परेशानी आ रही है। मजबूरी में पुलिस को इन शवों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश भेजना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बर्फ का इंतजाम कर शवों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।
इस बेहद संवेदनशील मामले पर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. उत्तम सिंह खरोला ने बताया कि यह एक इलेक्ट्रिकल उपकरण है, जिसमें ओवरलोडिंग या बिजली की दिक्कतों की वजह से तकनीकी खराबी आती रहती है। उन्होंने कहा, “इस बार स्थिति थोड़ी ज्यादा जटिल हो गई है, क्योंकि जिस वक्त फ्रीजर में शव रखा गया, ठीक उसी समय वह खराब हो गया। शव की मौजूदगी में फ्रीजर को ठीक करना वैसा ही चुनौतीपूर्ण है, जैसे उड़ते हुए हवाई जहाज को बीच हवा में रिपेयर करना।”
कंडम हो सकता है फ्रीजर, शाम तक पहुंचेगी तकनीकी टीम डॉ. खरोला के अनुसार, अंदेशा है कि फ्रीजर में कोई बड़ी खराबी आई है। स्थिति ऐसी भी हो सकती है कि इसे पूरी तरह से अनुपयोगी (कंडम) घोषित कर नया फ्रीजर खरीदना पड़े।
अस्पताल के उपकरणों की मरम्मत की जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और KTPL किर्लोस्कर कंपनी के बीच एक अनुबंध (समझौता) हुआ है। इसके तहत अस्पताल के सभी इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी इसी कंपनी की है। अस्पताल प्रशासन ने कंपनी को लिखित और ईमेल के जरिए खराबी की सूचना दे दी है। कंपनी ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया है कि उनके तकनीकी विशेषज्ञ आज शाम तक अस्पताल पहुंच जाएंगे, जिसके बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।

