ऋषिकेश नगर निगम की बोर्ड बैठक सोमवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक शुरू होते ही पार्षदों ने निगम प्रशासन पर भेदभाव और अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। पार्षदों के कड़े रुख को देखते हुए अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद व्यवस्थाएं दुरुस्त होने पर ही कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी।
कुर्सियों पर धूल और टेबल न होने पर बिफरे पार्षद
तय कार्यक्रम के अनुसार, नगर निगम कार्यालय के समीप स्थित राज्य आंदोलनकारी भवन में बोर्ड बैठक बुलाई गई थी। जैसे ही पार्षद बैठक कक्ष में दाखिल हुए, वहां के इंतजाम देखकर उनका पारा चढ़ गया। पार्षद देवेंद्र प्रजापति, रामकुमार संगर सहित अन्य पार्षदों ने आरोप लगाया कि पार्षदों के बैठने के लिए सम्मानजनक व्यवस्था नहीं की गई थी।
पार्षदों का कहना था कि:
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उनकी कुर्सियों पर भारी धूल जमी हुई थी।
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फाइलें रखने के लिए पार्षदों के आगे टेबल तक की व्यवस्था नहीं थी।
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इसके विपरीत, अधिकारियों ने अपने लिए आरामदायक कुर्सियों और टेबल का पूरा इंतजाम किया हुआ था।
अधिकारियों के फूले हाथ-पांव
पार्षदों ने इसे अपना अपमान बताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया और भवन से बाहर निकल आए। पार्षदों की नाराजगी और सदन खाली होते देख निगम अधिकारियों में खलबली मच गई। स्थिति बिगड़ती देख अधिकारियों ने तत्काल पार्षदों को मनाया और आनन-फानन में उनके लिए टेबल और बैठने की उचित व्यवस्था करवाई।
देर से शुरू हुई बैठक, पर बरकरार रहा आक्रोश
अधिकारियों के मान-मनौव्वल और व्यवस्थाओं में सुधार के आश्वासन के बाद पार्षद दोबारा बैठक में शामिल होने को राजी हुए। हालांकि, बैठक शुरू होने के बाद भी पार्षदों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और सदन के भीतर अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।

इस घटना ने नगर निगम के प्रबंधकीय दावों की पोल खोल दी है और यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जनप्रतिनिधियों के लिए बुनियादी शिष्टाचार और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने में प्रशासन कैसे विफल रहा।

