ऋषिकेश/पौड़ी गढ़वाल। कहते हैं कि वर्दी के भीतर अगर एक संवेदनशील दिल हो, तो वह उजड़े हुए संसार को फिर से बसा सकता है। जनपद पौड़ी गढ़वाल की लक्ष्मण झूला पुलिस ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के दौरान पुलिस ने न केवल एक लावारिस बुजुर्ग की सुध ली, बल्कि 20 वर्षों से उनसे बिछड़े परिवार को ढूंढकर उनके जीवन में खुशियां लौटा दीं।
सत्यापन अभियान के दौरान मिले ‘गौरी जोशी’
थाना लक्ष्मण झूला पुलिस क्षेत्र में अपराधियों और संदिग्धों की धरपकड़ के लिए ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के तहत सत्यापन की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम की नजर एक बुजुर्ग पर पड़ी जो काफी समय से क्षेत्र में लावारिस और संदिग्ध अवस्था में घूम रहे थे।
पूछताछ में उन्होंने अपना नाम गौरी जोशी निवासी नेपाल बताया। हालांकि, मानसिक स्थिति ठीक न होने और लंबे समय से घर से दूर रहने के कारण उनसे सटीक जानकारी जुटाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
सोशल मीडिया और तकनीक का सहारा
पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और धैर्यपूर्वक बुजुर्ग से संवाद जारी रखा। स्थानीय स्तर पर पहचान स्थापित करने के प्रयासों के साथ-साथ पुलिस ने तकनीक और विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर नेपाल के संबंधित थानों से संपर्क साधा। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार उनके परिजनों का पता ठिकाना मिल गया।
20 साल का इंतजार खत्म, भावुक हुआ परिवार
जब पुलिस ने नेपाल स्थित परिजनों को गौरी जोशी के सुरक्षित होने की सूचना दी, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। जिस व्यक्ति के लौटने की उम्मीद परिवार दो दशक पहले छोड़ चुका था, उसे वापस पाने के लिए परिजन तुरंत लक्ष्मण झूला थाने पहुंचे।
मुख्य बिंदु:
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- बिछड़ने का समय: लगभग 20 वर्ष।
- पुलिस की भूमिका: मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पहचान स्थापित की और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बुजुर्ग को सुपुर्द किया।
- परिजनों की प्रतिक्रिया: अपनों को सही-सलामत पाकर परिवार के सदस्य भावुक हो उठे और पुलिस टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया।
”पुलिस का कार्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी मानवीय जिम्मेदारियों को निभाना भी है। बुजुर्ग को उनके परिवार से मिलाना पूरी टीम के लिए संतोषजनक पल रहा।”
— लक्ष्मण झूला पुलिस टीम

