
ऋषिकेश: पुलवामा हमले की बरसी पर ऋषिकेश के गंगा तट स्थित परमार्थ निकेतन में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। पुलवामा हमले में राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों की स्मृति में शनिवार को परमार्थ निकेतन के पावन तट पर विशेष श्रद्धांजलि सभा और हवन यज्ञ का आयोजन किया गया।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालुओं और ऋषिकुल के बटुकों ने भाग लिया।

हवन यज्ञ और राष्ट्र धर्म की साधना
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष आहुतियों के साथ हुई। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने यज्ञ कुंड में आहुति डालते हुए कहा कि पुलवामा के शहीदों का बलिदान कोई सामान्य त्याग नहीं है, बल्कि यह “राष्ट्र धर्म की सर्वोच्च साधना” है। उन्होंने कहा कि आज हम सुरक्षित हैं क्योंकि सीमाओं पर हमारे वीर जवान हर परिस्थिति से जूझते हुए मुस्तैद खड़े हैं।
भारत की आत्मा को झकझोरने वाला दिन
स्वामी जी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 14 फरवरी का वह दिन भारत की अंतरात्मा को झकझोरने वाला था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा-“यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता और सुरक्षा की कीमत क्या है। शहीदों के परिवार भी उतने ही वंदनीय हैं, जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को माँ भारती की सेवा में समर्पित कर दिया।”
युवाओं से आह्वान
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहें, बल्कि शहीदों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) की भावना को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया और कहा कि हर नागरिक को अपने क्षेत्र में ईमानदारी से कार्य कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
गंगा आरती में शहीदों के नाम जलाए दीप
यज्ञ के पश्चात, सायं काल की प्रसिद्ध गंगा आरती को भी वीर शहीदों को समर्पित किया गया। माँ गंगा की लहरों पर शहीदों की स्मृति में दीप दान किया गया और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की गई।

