




देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर एक बार फिर अपनी सरकार का सख्त रुख स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि देवभूमि की पवित्रता और उसके मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“अतिक्रमण हटाना किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं”
अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी वर्ग विशेष को लक्षित (Target) करके नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा:
“अतिक्रमण हटाना किसी समुदाय के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की डेमोक्रेसी (लोकतंत्र), सांस्कृतिक मूल्यों और यहाँ के अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य की रक्षा करने का हमारा संकल्प है।”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि देवभूमि के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और अवैध कब्जे इस पहचान के लिए खतरा हैं।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज
इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अमले को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में यदि किसी भी क्षेत्र में नया अतिक्रमण पाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
सरकार की नई रणनीति के मुख्य बिंदु:
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शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance): सरकारी जमीन पर नए कब्जों पर तत्काल रोक।
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जवाबदेही तय: क्षेत्र के संबंधित अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
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नियमित निगरानी: अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीनों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम।
देवभूमि की सुरक्षा का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड न केवल अपनी सुंदरता बल्कि अपनी सांस्कृतिक मर्यादा के लिए जाना जाता है। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि ये प्रदेश के विकास और पर्यावरण संतुलन में भी बाधा उत्पन्न करते हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को अतिक्रमण मुक्त बनाकर इसके प्राकृतिक और सामाजिक ढांचे को सुरक्षित करना है।
इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में प्रदेश भर में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान और भी तेज होगा और शासन-प्रशासन की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

