




ऋषिकेश
कहते हैं कि यदि मन में कुछ करने का जज्बा और हौसला बुलंद हो, तो शारीरिक अक्षमता भी आपके रास्तों में रोड़ा नहीं बन सकती। इस कहावत को ऋषिकेश की दिव्यांग बेटी नीरजा गोयल ने पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है। इन दिनों चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए नीरजा आकर्षण और गहरी श्रद्धा का केंद्र बनी हुई हैं।
ऋषिकेश के चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप परिसर में नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इस भंडारे के माध्यम से नीरजा और उनकी टीम प्रतिदिन दोपहर के समय लगभग 700 श्रद्धालुओं को भरपेट भोजन प्रसाद करा रही है। यात्रा की थकान के बीच नि:स्वार्थ भाव से की जा रही इस सेवा को देखकर श्रद्धालु भावुक हैं और नीरजा को दिल से दुआएं दे रहे हैं। भोजन ग्रहण करने वाले यात्रियों का कहना है कि दिव्यांग होने के बावजूद जनसेवा के प्रति उनका यह समर्पण अद्भुत और वंदनीय है।
समाज सेवा का व्यापक दायरा
नीरजा गोयल की समाज सेवा केवल भंडारे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे लंबे समय से समाज के वंचित और जरूरतमंद तबके के लिए एक मसीहा के रूप में काम कर रही हैं:
-
मुफ्त शिक्षा: उन्होंने ऋषिकेश के मायाकुंड क्षेत्र में एक निशुल्क शिक्षण संस्थान खोला है, जहां गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारा जा रहा है।
-
दिव्यांगों की सहायता: खुद दिव्यांग होने के कारण वे दूसरों का दर्द बखूबी समझती हैं। वे समय-समय पर जरूरतमंद दिव्यांगों को ट्राई-साइकिल, बैसाखी और अन्य सहायक उपकरण मुफ्त में बांटती हैं।
-
स्वास्थ्य सेवाएं: चिकित्सा के क्षेत्र में हाथ बंटाते हुए वे मरीजों को फ्री दवाइयां उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा, उन्होंने मायाकुंड की आंगनवाड़ी में एक निशुल्क फिजियोथैरेपी सेंटर भी खोला है, जहां मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाता है।
शारीरिक चुनौतियों को मात देकर समाज के हर वर्ग को संबल देने वाली नीरजा गोयल आज न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का एक अनुपम उदाहरण बन चुकी हैं।

