संवाददाता- अरविन्दर सिंह
ऋषिकेश। विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी और योग नगरी ऋषिकेश इन दिनों एक बेहद गंभीर और ‘विकराल महामारी’ जैसी समस्या से जूझ रही है—और वह समस्या है बेकाबू होता अतिक्रमण। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की लगातार बनी हुई उदासीनता के चलते अतिक्रमणकारियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि शहर की मुख्य सड़कों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। स्थिति अब इतनी बदतर हो चुकी है कि प्रमुख मार्गों पर आम राहगीरों और स्थानीय निवासियों का पैदल चलना भी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी गंभीर समस्या की ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं।
पर्यटन और स्थानीय जीवन पर गहरा असर
शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में पैर पसार चुके इस अतिक्रमण ने न केवल स्थानीय जनता, बल्कि देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का जीना भी मुहाल कर दिया है। ऋषिकेश की पहचान इसके आध्यात्मिक और शांत वातावरण से है, लेकिन सड़कों पर पसरा यह जाम और अव्यवस्था इस छवि को धूमिल कर रही है।
इन प्रमुख इलाकों में स्थिति सबसे खराब
अतिक्रमण की सबसे मारक स्थिति शहर के इन प्रमुख और आंतरिक मार्गों पर देखने को मिल रही है:
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त्रिवेणी घाट मुख्य मार्ग: मां गंगा की पावन आरती के लिए जाने वाले इस मुख्य रास्ते और इससे जुड़ने वाले आंतरिक मार्गों पर सबसे ज्यादा दबाव है।
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मुखर्जी चौक: इस व्यस्त चौराहे पर सुबह से लेकर रात तक अव्यवस्था का माहौल रहता है।
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क्षेत्र रोड और रेलवे रोड: इन दोनों महत्वपूर्ण मार्गों की हालत भी बद से बदतर हो चुकी है, जहां वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है।
गुरुवार की ‘तस्वीर’ खोलती है अतिक्रमण की पोल
इस पूरी अव्यवस्था के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और ध्यान देने योग्य पहलू भी सामने आया है। हर सप्ताह गुरुवार को जब बाजार बंद रहता है, तब ये सभी इलाके और सड़कें पूरी तरह चौड़ी और साफ-सुथरी नजर आती हैं। लेकिन सप्ताह के बाकी दिनों में अतिक्रमण की वजह से यही सड़कें सिकुड़ कर आधी रह जाती हैं।
यह साफ तौर पर दर्शाता है कि समस्या सड़कों की चौड़ाई की नहीं, बल्कि उन पर किए गए अवैध कब्जों की है।
बड़े दुकानदारों से लेकर रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा
सड़कों के इस तरह सिकुड़ने के पीछे बड़े दुकानदारों से लेकर रेहड़ी-पटरी वाले समान रूप से जिम्मेदार हैं। इन व्यस्त मार्गों पर बड़े दुकानदारों ने अपनी दुकानों का सामान फुटपाथों को पार करते हुए सड़क के बीचों-बीच तक सजा रखा है। वहीं, रही-सही कसर रेहड़ी-पटरी वाले पूरी कर देते हैं। इस दोहरे अतिक्रमण के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है और पैदल चलने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए हर कदम जोखिम भरा साबित हो रहा है।
जनता पूछ रही सवाल: कब जागेगा प्रशासन?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक नगर निगम और स्थानीय प्रशासन कड़े कदम नहीं उठाएगा और नियमित रूप से चेकिंग अभियान नहीं चलाएगा, तब तक ऋषिकेश को इस समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकती। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन कब जागता है और तीर्थनगरी को इस गंभीर संकट से कब निजात दिलाता है।

