ऋषिकेश। नगर निगम द्वारा अपनी दुकानों के किराए में की गई बेतहाशा और अनियमित वृद्धि को लेकर स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस एकतरफा फैसले के विरोध में आज ‘व्यापार प्रतिनिधि मंडल, ऋषिकेश’ के एक शिष्टमंडल ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर नगर आयुक्त विजयनाथ शुक्ल से मुलाकात की। व्यापारियों ने इस निर्णय पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए बढ़े हुए किराए को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
“15 से 20 हजार की वृद्धि पूरी तरह तर्कहीन और तानाशाही”
नगर आयुक्त से मुलाकात के दौरान व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष ललित मोहन मिश्रा और महामंत्री प्रतीक कालिया ने निगम प्रशासन के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने दो टूक कहा कि नगर निगम द्वारा दुकानों का किराया सीधे 15 से 20 हजार रुपये तक बढ़ा दिया गया है, जो पूरी तरह से तर्कहीन और अव्यावहारिक है।
व्यापारिक नेताओं ने बाजार की जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान समय में व्यापारिक स्थितियां पहले से ही काफी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही हैं। ऐसे मंदी के माहौल में व्यापारी इतना भारी आर्थिक बोझ उठाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं। उन्होंने नगर निगम के इस फैसले को ‘तानाशाही और एकतरफा’ करार देते हुए कहा कि इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग
शिष्टमंडल ने व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखते हुए नगर आयुक्त से मांग की कि जिन भी दुकानदारों और व्यापारियों को किराया वृद्धि के नोटिस भेजे गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त (वापस) किया जाए।
सकारात्मक कदम न उठाने पर दी चेतावनी
व्यापार मंडल ने निगम प्रशासन को स्पष्ट रूप से चेताया है कि यदि इस संवेदनशील मामले में जल्द ही कोई सकारात्मक और न्यायोचित कदम नहीं उठाया गया, तो व्यापारियों के पास सड़कों पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि हक की लड़ाई के लिए व्यापार मंडल उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।

