14 जून, 2026
ऋषिकेश: वीकेंड और सोमवती अमावस्या के पावन स्नान के पावन अवसर पर योगनगरी ऋषिकेश में श्रद्धालुओं और पर्यटकों का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा है। लाखों की संख्या में देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं के वाहनों के कारण शहर की पूरी यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। स्थिति यह है कि सुबह से ही शहर के मुख्य मार्गों पर कई किलोमीटर लंबा महाजाम लगा हुआ है, जिसने स्थानीय निवासियों से लेकर बाहरी पर्यटकों तक का जीना मुहाल कर दिया है।
मुख्य हाईवे से लेकर एम्स रोड तक सब ठप
श्रद्धालुओं के वाहनों की भारी आमद के चलते हरिद्वार रोड और एम्स रोड जैसे शहर के सबसे व्यस्त और मुख्य मार्ग पूरी तरह जाम की चपेट में हैं। सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें रेंगती नजर आ रही हैं। इस महाजाम का सबसे संवेदनशील और चिंताजनक पहलू यह रहा कि आपातकालीन सेवाएं भी इसकी भेंट चढ़ गईं। गंभीर मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस भी घंटों इस जाम में फंसी रही, जिससे मरीजों की जान पर बन आई। हालांकि, पुलिस प्रशासन के जवान हर चौक-चौराहे पर मुस्तैद रहकर ट्रैफिक को सुचारू करने की जद्दोजहद में जुटे हैं, लेकिन वाहनों के अत्यधिक दबाव के आगे खाकी की सारी कोशिशें नाकामी साबित हो रही हैं।
शॉर्टकट के चक्कर में रिहायशी गलियाँ बनीं ‘स्पीडवे’
मुख्य सड़कों पर लगे इस भयानक जाम से बचने के लिए स्थानीय ऑटो और टेंपो चालकों ने अब शहर के शांत रिहायशी इलाकों और अंदरूनी गलियों का रुख कर लिया है। इन तंग गलियों में तेज रफ्तार से दौड़ते वाहनों के कारण स्थानीय मोहल्लों में रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है और हादसों की आशंका बेहद बढ़ गई है। जो गलियां अमूमन शांत रहती थीं, वे भी अब गाड़ियों के धुएं और हॉर्न के शोर से पस्त हैं।
गूगल मैप ने पर्यटकों को और उलझाया
इस जाम का खामियाजा बाहरी राज्यों से आए पर्यटकों को भी भुगतना पड़ रहा है। मुख्य हाईवे पर घंटों फंसने के बाद जब पर्यटक गूगल मैप (Google Maps) के जरिए कोई शॉर्टकट ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं, तो तकनीक उन्हें शहर की बेहद तंग गलियों में ले जाकर फंसा रही है, जिससे स्थिति और अधिक पेचीदा हो गई है।
अतिक्रमण और राजनीतिक दबाव बनी बदहाली की वजह!
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का साफ कहना है कि इस बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था की सबसे बड़ी और असल वजह शहर में पैर पसार चुका अवैध अतिक्रमण है। ऋषिकेश की सड़कें पहले ही संकरी हैं, और उस पर दुकानों व रेहड़ी-पटरी वालों द्वारा किए गए अतिक्रमण ने आग में घी का काम किया है।
प्रशासनिक शिथिलता पर उठे सवाल: शहर में यह भी चर्चा आम है कि राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासनिक अधिकारी बाजार और सड़कों से अतिक्रमण हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। प्रशासन की इसी ढुलमुल नीति और शिथिलता का खामियाजा आज न सिर्फ आस्था लेकर आए श्रद्धालु, बल्कि ऋषिकेश के टैक्सपेयर्स और स्थानीय नागरिक भुगतने को मजबूर हैं।
स्थानीय जनता ने प्रशासन से मांग की है कि त्योहारों और वीकेंड पर ट्रैफिक का कोई ठोस प्लान तैयार किया जाए और जल्द से जल्द राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाकर अतिक्रमण पर पीला पंजा चलाया जाए, ताकि भविष्य में ऋषिकेश को ऐसे ‘ब्लैकआउट’ से बचाया जा सके।

