




ऋषिकेश: ऋषिकेश और प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव क्षेत्र में आज से कांवड़ यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। यात्रा शुरू होते ही नीलकंठ जाने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में उमड़ने लगी है। चारों तरफ “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों की गूंज से पूरा माहौल शिवमय हो गया है।
कांवड़ यात्रा के शुरुआती दौर में ‘पंचक’ का महायोग
इस बार कांवड़ यात्रा के शुरुआती चरण में ही ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण पंचक का महायोग बन रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, 31 जुलाई से लेकर 4 अगस्त तक पंचक काल प्रभावी रहेगा।
पंचक के दौरान ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें:
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नया अनुष्ठान व कांवड़ उठाना वर्जित: ज्योतिषाचार्य गुरु दिवाकर पैन्यूली के अनुसार, शास्त्रों में पंचक की अवधि में कोई भी नया शुभ कार्य, नया अनुष्ठान आरंभ करना या नई कांवड़ उठाना वर्जित माना गया है।
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जोखिम भरे कार्यों से बचें: इन पांच दिनों के दौरान किसी भी प्रकार के जोखिम भरे या नए कार्यों को शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
श्रद्धालुओं के लिए विद्वानों की सलाह
शास्त्रों के विद्वानों ने भोलेनाथ के भक्तों को सलाह दी है कि:
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जल भरने का समय: जो श्रद्धालु कांवड़ उठाने का संकल्प ले रहे हैं, वे या तो पंचक शुरू होने से पहले जल भर लें, या फिर 4 अगस्त को पंचक समाप्त होने के बाद ही अपनी कांवड़ उठाएं।
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सात्विकता का पालन: सावन के इस पवित्र महीने में श्रद्धालुओं को पूरी तरह पवित्र रहकर तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए और सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की आराधना करनी चाहिए।
मान्यता है कि नियम और भक्ति भाव से की गई शिव आराधना से भक्तों को विशेष फल और महादेव की कृपा प्राप्त होती है।

