ऋषिकेश से स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली को उजागर करती एक बड़ी खबर सामने आई है। चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
यात्रा मार्ग पर मुस्तैद 108 एंबुलेंस खुद ‘बीमार’ नजर आ रही है। वायरल तस्वीरों और स्थानीय लोगों के अनुसार, आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के बजाय एंबुलेंस कर्मचारी खुद गाड़ी को धक्का मारते दिखे। इंजन में तकनीकी खराबी के चलते धक्कों की हैट्रिक लगाने के बाद भी गाड़ी चालू होने का नाम नहीं ले रही थी।
सरकारी दावों पर उठे सवाल
सरकार ने चारधाम यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रांजिट कैंप में 24 ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन काउंटर और प्राथमिक उपचार केंद्र (Primary Health Centre) की व्यवस्था तो की है, लेकिन आपात स्थिति में जान बचाने का जिम्मा जिस एंबुलेंस पर है, उसकी यह बदहाली किसी गंभीर हादसे का सबब बन सकती है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि यदि किसी श्रद्धालु या मरीज की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ जाए और उसे तुरंत एम्स (AIIMS) या जिला अस्पताल रेफर करना पड़े, तो एंबुलेंस को धक्के मारने के दौरान मरीज की जान पर क्या बीतेगी?
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में आक्रोश
108 एंबुलेंस सेवा की इस ढुलमुल व्यवस्था से स्थानीय लोग और व्यापारी बेहद परेशान हैं। व्यापारी पंकज गुप्ता ने बताया कि ऋषिकेश में आपातकालीन नंबर 108 पर कॉल करने पर अक्सर यही जवाब मिलता है कि स्थानीय एंबुलेंस व्यस्त है। किसी भी हादसे या इमरजेंसी के वक्त रानीपोखरी या डोईवाला से एंबुलेंस भेजने की बात कहकर मरीजों को लंबे इंतजार के लिए छोड़ दिया जाता है।
108 एंबुलेंस प्रबंधन की सफाई
मामला तूल पकड़ने पर 108 एंबुलेंस के जीएम अनिल शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि शनिवार शाम को गाड़ी में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसे अब पूरी तरह दुरुस्त कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि एंबुलेंस फिलहाल पूरी तरह फिट है और लगातार सेवाएं दे रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ट्रांजिट कैंप की एंबुलेंस किसी कारणवश व्यस्त होती है, तो रायवाला, छिद्दरवाला या एम्स ऋषिकेश में तैनात अन्य गाड़ियों को बैकअप के रूप में तुरंत मौके पर भेजा जाता है।

