ऋषिकेश: ऋषिकेश एम्स (AIIMS Rishikesh) परिसर में वाहनों के प्रवेश और ठहराव पर पार्किंग शुल्क लागू किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। एम्स प्रशासन द्वारा पार्किंग शुल्क वसूलने की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है। जनप्रतिनिधियों ने इसे मरीजों और उनके परिजनों (तीमारदारों) का आर्थिक उत्पीड़न करार देते हुए इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
20 से 50 रुपये तक वसूला जा रहा है शुल्क
मिली जानकारी के अनुसार, ऋषिकेश एम्स में काफी लंबे समय से पार्किंग पूरी तरह से नि:शुल्क थी। हालांकि, प्रशासन द्वारा हाल ही में नया नियम लागू कर दुपहिया (टू-व्हीलर) वाहनों से 20 रुपये और चौपहिया (फोर-व्हीलर) वाहनों से 50 रुपये का शुल्क वसूलना शुरू कर दिया गया है।
’10 रुपये की पर्ची पर इलाज, फिर भारी पार्किंग शुल्क क्यों?’
एम्स प्रशासन के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए जनप्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र सरकार और एम्स का उद्देश्य आम जनता को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं देना है, जहां महज 10 रुपये की परामर्श पर्ची पर मरीजों का इलाज किया जाता है। ऐसे में निजी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से तीमारदारों पर 20 और 50 रुपये का पार्किंग शुल्क थोपना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
नो पार्किंग की समस्या और सड़कों पर जाम
पार्किंग शुल्क लागू होने का असर एम्स परिसर के बाहर भी देखने को मिल रहा है। भारी शुल्क से बचने के लिए लोग एम्स परिसर के बाहर सड़कों पर ही वाहन खड़े कर रहे हैं, जिससे अस्पताल के आसपास ‘नो पार्किंग’ क्षेत्र में बेतरतीब वाहन खड़े हो रहे हैं और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
एम्स प्रशासन से मुलाकात और आंदोलन की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे एम्स प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर इस जनविरोधी पार्किंग शुल्क को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग करेंगे। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि एम्स प्रशासन ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो जनता के हित में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।

