ऋषिकेश। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के निर्देश पर ऋषिकेश नगर क्षेत्र में बाल श्रम उन्मूलन के तहत एक सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान श्रम विभाग की टीम ने जिला स्तरीय टास्क फोर्स के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया और शहर के चार अलग-अलग प्रतिष्ठानों से चार नाबालिग बाल श्रमिकों को सकुशल मुक्त कराया है।
विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी, 11 से 17 वर्ष के बच्चे रेस्क्यू
श्रम विभाग और टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में औचक छापेमारी कर नाबालिगों को रेस्क्यू किया:
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गीतानगर: यहां स्थित आशीष लूथरा की दुकान से एक 17 वर्षीय किशोर को मुक्त कराया गया।
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स्टील की दुकान: लाखा भाई पटेल की स्टील की दुकान पर काम कर रहे एक 15 वर्षीय बालक को रेस्क्यू किया गया।
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हरिद्वार रोड (कोयलघाटी): यहाँ गीता कंडवाल के रेस्टोरेंट से एक 17 वर्षीय किशोर को छुड़ाया गया। बताया जा रहा है कि यह किशोर पिछले चार वर्षों से इसी रेस्टोरेंट में काम कर रहा था।
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रेलवे रोड: यहाँ विष्णु देव की अंडों की दुकान से एक 11 वर्षीय मासूम नाबालिग को बाल श्रम से मुक्त कराया गया।
बाल कल्याण समिति के समक्ष किए गए पेश
श्रम प्रवर्तन अधिकारी आनंद के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए सभी चारों बच्चों को सुरक्षित निकालने के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है। समिति अब इन बच्चों के पुनर्वास और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेगी।
दुकान और रेस्टोरेंट संचालकों पर कानूनी शिकंजा
इस मामले में प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अपर श्रम आयुक्त अनिल चंद्र पेटवाल की निगरानी में संबंधित दुकान और रेस्टोरेंट संचालकों के खिलाफ कोतवाली में नामजद तहरीर दी गई है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने सभी दोषियों के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रशासन की चेतावनी: बाल श्रम एक गंभीर कानूनन अपराध है। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान संचालक को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे सघन चेकिंग अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

