ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश में प्रस्तावित ‘ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना’ को लेकर एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री के साथ हुई हालिया बैठक के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि अंग्रेजों के जमाने से संचालित हो रहा ऐतिहासिक ऋषिकेश रेलवे स्टेशन अब हमेशा के लिए यात्रियों के लिए बंद किया जा सकता है। इस खबर के सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों में इस ऐतिहासिक धरोहर के वजूद को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं।
सांस्कृतिक पहचान के रूप में विकसित होगी रेलवे की भूमि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के भव्य विकास के लिए पुराने रेलवे स्टेशन की बेशकीमती भूमि का उपयोग करने की योजना है। इस सिलसिले में पुराने रेलवे स्टेशन को पूरी तरह से नया रूप देने के लिए उत्तराखंड सरकार और रेल विकास निगम (RVNL) के बीच आपसी सहमति बन रही है। नए प्लान के मुताबिक, इस ऐतिहासिक स्टेशन की जगह पर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाली इमारतों और बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाएगा। सरकार के इस कदम से साफ है कि भविष्य में इस स्टेशन का इस्तेमाल पूरी तरह से गैर-रेलवे गतिविधियों के लिए होगा, जिससे यहां ट्रेनों की आवाजाही हमेशा के लिए थम सकती है।
फैसले पर बंटा शहर: व्यापार मंडल ने दी आंदोलन की चेतावनी, भाजपा ने किया स्वागत
इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन को बंद किए जाने की संभावना पर शहर में राजनीति और विरोध भी शुरू हो गया है। स्थानीय व्यापार मंडल के अध्यक्ष ललित मोहन मिश्रा ने इस योजना पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने रेलवे स्टेशन को बंद करने के किसी भी प्रयास पर उग्र विरोध करने की चेतावनी दी है। मिश्रा का दावा है कि इस संबंध में व्यापारियों की चिंताओं से अवगत कराते हुए मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन भी भेजा जा रहा है।
दूसरी ओर, सत्तापक्ष इस परियोजना के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है। भाजपा नेता पंकज गुप्ता ने इस योजना का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना के तहत रेलवे स्टेशन की जगह का विकास किया जाना एक स्वागत योग्य कदम है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।
फिलहाल, इस ऐतिहासिक स्टेशन के भविष्य और गंगा कॉरिडोर के स्वरूप को लेकर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

