ऋषिकेश: अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री संगठन उत्तराखण्ड से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं ने ऋषिकेश में एक विशाल आक्रोश रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया। यह रैली सरकारी अस्पताल से शुरू होकर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय तक पहुंची। रैली के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और एसडीएम के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक 13 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रीढ़, फिर भी उपेक्षित सौंपे गए ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में टीकाकरण, स्वच्छता, जच्चा-बच्चा देखभाल, पल्स पोलियो अभियान, टीबी व डेंगू उन्मूलन और कुष्ठ रोग जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करती हैं। केंद्र और राज्य सरकार के सभी महत्वपूर्ण कार्यों को जमीनी स्तर पर उनके द्वारा ही अमलीजामा पहनाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें आज तक राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है, जो उनके साथ सरासर अन्याय है।
ये हैं आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें:
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राज्य कर्मचारी का दर्जा और वेतन: आशा कार्यकर्ताओं को तत्काल राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए और उनका न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये प्रति माह निर्धारित हो।
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दुर्घटना व मृत्यु मुआवजा: ड्यूटी के दौरान दुर्घटना होने पर 5 लाख रुपये और मृत्यु होने की स्थिति में परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
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सेवानिवृत्ति लाभ: सेवानिवृत्त होने पर आशा कार्यकर्ताओं को 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाए।
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पदोन्नति और प्रशिक्षण: अनुभवी आशा कार्यकर्ताओं को टीकाकरण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही, उम्र का बंधन हटाकर योग्यता धारी आशा कार्यकर्ताओं को ए.एन.एम. (ANM) के पद पर पदोन्नत किया जाए।
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भत्ते और सुविधाएं: आशा कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सफल यात्रा भत्ता दिया जाए और फील्ड वर्क को आसान बनाने के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटी प्रदान की जाए।
मानदेय और प्रोत्साहन राशि बढ़ाने पर जोर: प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक विसंगतियों को दूर करने की मांग करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों से पल्स पोलियो कार्य के लिए मात्र 150 रुपये प्रतिदिन मिल रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 800 रुपये प्रतिदिन किया जाए। इसके अलावा:
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राज्य कर्मचारियों की तरह हर महीने किए गए कार्यों का नियमित भुगतान हो।
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वर्तमान में मिलने वाली किसी भी कार्य की प्रोत्साहन राशि को 4 गुना बढ़ाया जाए।
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राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली राज्य प्रोत्साहन राशि को 3,300 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये तय किया जाए।
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डेंगू नियंत्रण क्षेत्र में काम करने के बदले प्रति माह 5,000 रुपये का मानदेय मिले।
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आशा हेल्प डेस्क की ड्यूटी के लिए मिलने वाले 150 रुपये को बढ़ाकर 800 रुपये किया जाए।
आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगी।

