देहरादून: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 बच्चों की दर्दनाक मौत की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयावह हादसे ने कोचिंग सेंटरों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा और वहाँ के पुख्ता इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लखनऊ की इस त्रासदी से सबक लेते हुए देहरादून जिला प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी देहरादून के कई इलाकों में ऐसे दर्जनों कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जो बेहद संकरी गलियों और छोटे-छोटे मकानों में चल रहे हैं। इन जगहों पर आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) और वेंटिलेशन जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे हर वक्त किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।
जिलाधिकारी ने दिए संयुक्त अभियान के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी (DM) डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने जिले के सभी उपजिलाधिकारियों (SDMs) को अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले सभी कोचिंग सेंटरों की सघन जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
जिलाधिकारी के आदेशानुसार:
- संयुक्त टीम करेगी जांच: यह अभियान केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं होगा, बल्कि पुलिस और अग्निशमन (फायर) विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर एक संयुक्त टीम बनाई जाएगी।
- मानकों की होगी परख: यह टीम मौके पर जाकर अग्नि सुरक्षा मानकों, फायर एक्सटिंग्विशर की उपलब्धता और आपातकालीन रास्तों की बारीकी से जांच करेगी।
लापरवाही पर होगी सीधी सीलिंग और कानूनी कार्रवाई
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने साफ किया है कि बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। नियमों और मानकों की अनदेखी करने वाले कोचिंग सेंटर संचालकों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस कड़े रुख के बाद अब अवैध रूप से या बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे कोचिंग सेंटरों में हड़कंप मच गया है।

