देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सामाजिक सौहार्द को लेकर राज्य सरकार का रुख एक बार फिर पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को अक्षुण्ण रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि राज्य में किसी भी समुदाय की आस्था को ठेस पहुँचाने वाले कृत्यों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धार्मिक स्थल सकारात्मक मार्गदर्शन के केंद्र
मुख्यमंत्री धामी ने धार्मिक स्थलों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
”हमारे सभी धार्मिक स्थल मात्र इमारतें नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और प्रेरणा के जीवंत केंद्र हैं। इन पवित्र स्थानों से ही समाज को सकारात्मक दिशा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। इसलिए इनकी गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है।”
आस्था को ठेस पहुँचाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
देवभूमि की कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द को सर्वोपरि बताते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का रुख इस मामले में बेहद कड़ा है। उत्तराखंड में ऐसा कोई भी कृत्य या गतिविधि स्वीकार नहीं की जाएगी, जिससे किसी भी धर्म, संप्रदाय या जन-आस्था को ठेस पहुँचे या कोई नुकसान हो। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन पूरी सख्ती से निपटेगा।
संवाद और सद्भाव ही समाधान का मार्ग
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए ‘संवाद’ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और समाज में किसी भी असहमति या समस्या का हल टकराव से नहीं, बल्कि मिल-बैठकर निकाला जा सकता है। संवाद, आपसी सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण के माध्यम से ही सभी समस्याओं का स्थाई और शांतिपूर्ण समाधान संभव है।

