देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय की कसौटी पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। ऐसा ही एक प्रतिष्ठित नाम है—भगत सिंह कोश्यारी का, जिन्हें पूरे राज्य में लोग बड़े ही आदर और अपनेपन से ‘भगत दा’ कहकर पुकारते हैं। कोश्यारी सिर्फ एक राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, प्रखर पत्रकार और पूरी तरह से समर्पित राष्ट्रवादी नेता हैं। उनका पूरा जीवन जन सेवा और समाज के सबसे गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के उत्थान की एक अनवरत कहानी है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्य भूषण’ से सम्मानित किया है। राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक भव्य नागरिक अलंकरण समारोह के दौरान उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया। भगत सिंह कोश्यारी को यह सम्मान ‘लोक कार्य’ (Public Affairs) के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट और दीर्घकालिक योगदान के लिए दिया गया है।
लंबे राजनीतिक और सामाजिक सफर को मिला सम्मान
भगत सिंह कोश्यारी का सार्वजनिक जीवन दशकों लंबा और बेदाग रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत करने वाले कोश्यारी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। वह उत्तराखंड के गठन के बाद राज्य के ऊर्जा और सिंचाई मंत्री बने और बाद में उन्होंने साल 2001 से 2002 तक प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली।
इसके बाद, उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई। वह संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्य रहे। साल 2019 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने एक लंबा और महत्वपूर्ण कार्यकाल पूरा किया।
लंबे राजनीतिक और सामाजिक सफर को मिला सम्मान
जमीन से जुड़े कार्यकर्ता और शिक्षाविद्
भगत सिंह कोश्यारी का जीवन सादगी और उच्च विचारों का जीवंत उदाहरण रहा है। एक शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने हमेशा समाज में ज्ञान के प्रकाश को फैलाने पर जोर दिया। उनका मानना रहा है कि शिक्षा ही वह अचूक माध्यम है जिसके जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाया जा सकता है। उन्होंने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पत्रकारिता के जरिए उठाई जनता की आवाज
राजनीति के शीर्ष पर पहुंचने से पहले ‘भगत दा’ ने पत्रकारिता के माध्यम से भी समाज की विसंगतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने एक सजग पत्रकार के रूप में जनता की समस्याओं, उनकी पीड़ा और विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों के पिछड़ेपन को प्रमुखता से उठाया। उनकी लेखनी में हमेशा राष्ट्रवाद की भावना और समाज सुधार का संकल्प झलकता था।
गरिमामयी समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस अलंकरण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र सरकार के कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ राजनेता और विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं।

