देहरादून पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के प्रमुख मोहन भागवत ने देश की मजबूती, समाज और जनसंख्या से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत को इतना मजबूत बनना होगा कि कोई भी देश हमें टैरिफ (कर) का डर न दिखा सके। उन्होंने तीन बच्चों के फॉर्मूले को जनसंख्या संतुलन के लिए सुरक्षित बताया और कहा कि जब तक समाज में भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण जरूरी रहेगा। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, राजनीति और सामाजिक एकता पर भी खुलकर बात की।
1. भारत को इतना मजबूत बनाना होगा कि टैरिफ का डर न दिखाया जा सके
मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया सत्य से ज्यादा शक्ति को मानती है। इसलिए भारत को इतना सशक्त बनना होगा कि कोई हमें टैरिफ या दबाव का डर न दिखा सके। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी व्यवस्था को मजबूत करना होगा और आपसी भेदभाव खत्म करना होगा। जब देश मजबूत होगा, तभी दुनिया में उसकी इज्जत होगी।
2. मैकाले की शिक्षा व्यवस्था बदलने में समय लगेगा
भागवत ने कहा कि 150 साल पुरानी मैकाले की शिक्षा प्रणाली को बदलने में समय लगेगा। उन्होंने बताया कि अब बच्चों को संस्कार, अनुशासन और तकनीक — तीनों के संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। युवाओं को आज की जरूरत के अनुसार कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) की शिक्षा देना जरूरी है।
3. संघ भाजपा को कंट्रोल नहीं करता
मोहन भागवत ने साफ कहा कि यह गलतफहमी है कि संघ भाजपा को नियंत्रित करता है। उन्होंने कहा संघ को सत्ता नहीं चाहिए। संघ का काम व्यक्ति निर्माण और समाज को जोड़ना है, जो स्वयंसेवक राजनीति में जाते हैं, वे संघ से अलग होकर काम करते हैं। संघ राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक संगठन है।
4. जनसंख्या संतुलन के लिए तीन बच्चों का फॉर्मूला सुरक्षित
भागवत ने कहा कि देश में जनसंख्या संतुलन बहुत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि तीन बच्चों का फॉर्मूला सुरक्षित है ताकि समाज में संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि जनसंख्या बोझ न बने, बल्कि देश की ताकत बने, इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संसाधनों की सही योजना बनानी होगी।
5. सभी भारतीयों का एक DNA
संघ प्रमुख ने कहा कि देश के सभी लोगों का डीएनए एक ही है। खानपान, पूजा-पाठ और परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी भारतीय एक ही परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का मतलब सभी को जोड़ना है, न कि बांटना।
जब समाज संगठित होगा, तब कोई भी देश को कमजोर नहीं कर सकेगा।
आरक्षण पर क्या बोले मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण जरूरी है। संविधान में तय नियमों के अनुसार आरक्षण लागू होना चाहिए। जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ चुके हैं, वे अब खुद इसे छोड़ रहे हैं, यह अच्छी सामाजिक चेतना का संकेत है। उन्होंने कहा कि गांव और शहर दोनों जगह भेदभाव अलग-अलग रूप में मौजूद है और इसे सामाजिक समरसता से ही खत्म किया जा सकता है।
संघ सत्ता नहीं चाहता
भागवत ने कहा कि संघ सत्ता की राजनीति नहीं करता। संघ का उद्देश्य है व्यक्ति निर्माण, समाज को संगठित करना, देश को मजबूत बनाना।
उन्होंने कहा कि संघ हर उस व्यक्ति की मदद करता है जो समाज के हित में काम करना चाहता है।

