मुनिकीरेती (ऋषिकेश)।
पहाड़ों की खूबसूरत वादियों और गंगा की लहरों के बीच ‘परफेक्ट सेल्फी’ लेने की चाहत एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार के लिए उम्र भर का मातम बन गई है। बीते दिनों कोड़ियाला में अपनी पत्नी और मासूम बेटी के सामने गंगा के तेज बहाव में बहे गाजियाबाद के सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष जैन का शव आखिरकार पुलिस और SDRF की टीम ने बरामद कर लिया है। 6 दिनों के कड़े सर्च ऑपरेशन के बाद टीम को आशीष का शव शिवपुरी क्षेत्र से मिला। पुलिस ने पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी कर शव को परिजनों को सौंप दिया है।
पत्नी और मासूम बेटी के सामने समाया था लहरों में
मूल रूप से गाजियाबाद के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष जैन बीते 6 जून को अपने परिवार के साथ घूमने आए थे। कोड़ियाला के पास गंगा किनारे तस्वीरें (सेल्फी) खिंचवाने के दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया। पानी का वेग इतना तेज था कि पत्नी और मासूम बच्ची के चीखने-पुल्लाने के बावजूद आशीष पल भर में उनकी आंखों के सामने ओझल हो गए।
ऋषिकेश पहुंचे आशीष के बूढ़े पिता जब अपने जवान बेटे की लाश के सामने पहुंचे, तो वह अपनी सुध-बुध खो बैठे। परिजनों की चीख-पुकार से मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
6 दिनों तक चला दिन-रात सर्च ऑपरेशन
बछेली खाल चौकी प्रभारी दीपक लिंगवाल और एसडीआरएफ (SDRF) के इंस्पेक्टर कविंद्र सजवाण ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया था।
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- रेस्क्यू टीम: स्थानीय पुलिस और SDRF की टीमें।
- चुनौती: गंगा का बढ़ा हुआ जलस्तर और तेज बहाव।
- नतीजा: लगातार दिन-रात चले कड़े खोजी अभियान के बाद अंततः शव को शिवपुरी क्षेत्र से खोज निकाला गया।
प्रशासन की सख्त चेतावनी:
इस दर्दनाक हादसे के बाद SDRF और स्थानीय प्रशासन बेहद सख्त रुख में है। पुलिस ने पर्यटकों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पहाड़ों में गंगा का वेग मैदानी इलाकों की तुलना में हजार गुना ज्यादा तेज और अप्रत्याशित होता है।
सैलानियों के लिए जरूरी गाइडलाइन: भूलकर भी न करें ये गलतियां
इस हादसे के बाद प्रशासन ने ऋषिकेश और आसपास के घाटों पर आने वाले सैलानियों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं:
- पानी में उतरने पर रोक: गंगा के किनारों पर जाकर स्टंट करना या गहरे पानी में उतरना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
- पत्थरों पर जबरदस्त फिसलन: गंगा की लहरों के बीच और किनारों पर मौजूद पत्थरों पर काई होने के कारण भारी फिसलन होती है। यहां एक छोटा सा असंतुलन सीधे मौत के मुंह में ले जा सकता है।
- खतरे के निशान की अनदेखी न करें: प्रशासन द्वारा लगाए गए चेतावनी बोर्ड और रेड जोन का सम्मान करें।
अपील: पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद लें, लेकिन सेल्फी और सोशल मीडिया रील्स के चक्कर में अपनी और अपने परिवार की जिंदगी को दांव पर न लगाएं।

