ऋषिकेश: धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर की प्रतीक तीर्थ नगरी ऋषिकेश में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत धूमधाम, श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर नगर के विभिन्न मंदिरों और प्रसिद्ध आश्रमों में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
जयराम आश्रम में रहा उत्सव का मुख्य केंद्र
गुरु पर्व का मुख्य आकर्षण ऋषिकेश स्थित जयराम आश्रम रहा। यहाँ सैकड़ों भक्तों ने उपस्थित होकर सदियों पुरानी सनातन गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन किया। श्रद्धालुओं ने आश्रम के परमाध्यक्ष ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और उनका पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त अपने गुरुदेव के दर्शन हेतु पहुंचे थे।
गुरु ही ईश्वर प्राप्ति का मार्गदर्शक: ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज
कार्यक्रम के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए परमाध्यक्ष ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने सनातन संस्कृति में गुरु के सर्वोपरि स्थान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“गुरु और शिष्य का संबंध अटूट तथा अत्यंत पावन है, जो प्राचीन काल से चला आ रहा है। गुरु ही वह एकमात्र मार्गदर्शक हैं, जिनके बताए सन्मार्ग पर चलकर जीव ईश्वर को प्राप्त कर सकता है।”
उन्होंने सभी उपस्थित भक्तों को गुरु द्वारा दिखाए गए सत्य, धर्म और नीति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
दीक्षा समारोह और प्रसाद वितरण
धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के पश्चात ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने स्वयं अपने हाथों से सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया। इस शुभ अवसर पर दर्जनों नए श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज से दीक्षा ग्रहण कर उनके शिष्यत्व को सहर्ष स्वीकार किया।
दिनभर चले इन आयोजनों के दौरान पूरा आश्रम परिसर ‘जय गुरुदेव’ के जयकारों से गुंजायमान रहा और चारों ओर भक्तिमय माहौल छाया रहा।

