




ऋषिकेश: देवभूमि ऋषिकेश में निराश्रित गौ वंश के संरक्षण और उन्हें समाज में उचित सम्मान दिलाने के लिए साधु-संतों ने एक बार फिर मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार को देहरादून रोड स्थित व्यापार सभा भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान संतों ने ‘गौ सम्मान अभियान’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना और देश में गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा जाएगा ज्ञापन
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए स्वामी गोपालाचार्य महाराज और वरिष्ठ समाजसेवी संजय अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान को निर्णायक मोड़ देने के लिए आगामी 27 अप्रैल को ऋषिकेश में एक बड़ा आयोजन किया जाएगा। इस दिन उप जिलाधिकारी (SDM) के माध्यम से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।
अभियान की प्रमुख मांगें:
संतों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
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राष्ट्रमाता का दर्जा: गौ माता को भारत की ‘राष्ट्रमाता’ के रूप में मौलिक अधिकार प्रदान किया जाए।
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गौ-हत्या पर प्रतिबंध: संपूर्ण भारत में गौ-हत्या को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए।
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अनुसंधान व अनुदान: गौ वंश के संरक्षण के लिए सरकार उचित अनुसंधान केंद्र खोले और गौशालाओं के लिए विशेष अनुदान (Fund) की व्यवस्था करे।
जन-भागीदारी और देशव्यापी रूपरेखा
स्वामी गोपालाचार्य ने कहा कि यह अभियान किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। इसमें राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन पूरे देश में चलाया जा रहा है और हर राज्य में तहसील स्तर पर ज्ञापन सौंपने की रूपरेखा तैयार की गई है।
“निराश्रित गौ वंश को सड़कों पर बेसहारा छोड़ना हमारी संस्कृति का अपमान है। अब समय आ गया है कि गौ माता को उनका संवैधानिक अधिकार मिले।” — स्वामी गोपालाचार्य महाराज
आम जनमानस से अपील
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उपस्थित संतों और पदाधिकारियों ने ऋषिकेश की जनता सहित देशवासियों से अपील की कि वे इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपना सक्रिय योगदान दें। संतों का मानना है कि जब तक जन-जन इस मुहिम से नहीं जुड़ेगा, तब तक गौ वंश की दशा में सुधार लाना चुनौतीपूर्ण होगा।
इस अवसर पर क्षेत्र के कई प्रमुख संत, व्यापार सभा के पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

