ऋषिकेश: धार्मिक नगरी ऋषिकेश में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही की पोल खुलती नजर आ रही है। यहां चंद्रभागा नदी के रास्ते सीवर का दूषित पानी सीधे मां गंगा में मिल रहा है, जिससे गंगा प्रेमियों और श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंच रही है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने सरकार और संबंधित विभागों से इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेने और नाले को टैप करने की जोरदार मांग की है।
प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ गंगा अभियान’ को लग रहा पलीता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंद्रभागा पुल के नीचे यमकेश्वर जाने वाले सवारी वाहन और छोटे हाथी (लोडर) यूनियन से जुड़े वाहन पार्क किए जाते हैं। इन वाहन चालकों का आरोप है कि यहां सीवर के पाइपों को खुला छोड़ दिया गया है, जिससे लगातार बह रहा गंदा और बदबूदार पानी चंद्रभागा नदी के रास्ते सीधे गंगा में मिल रहा है। चालकों का कहना है कि यह स्थिति केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ और ‘स्वच्छ गंगा अभियान’ के दावों की पोल खोल रही है।
भारी बदबू के बीच काम करने को मजबूर चालक
चंद्रभागा पुल के पास वाहन पार्क करने वाले चालकों का जीना मुहाल हो गया है। सीवर के गंदे पानी से उठ रही भारी बदबू के बीच चालकों को अपने वाहनों में बैठने और लंबे समय तक इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चालकों ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे पहले भी कई बार अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों में नाराजगी
चंद्रभागा पुल से रोजाना बड़ी संख्या में तीर्थयात्री, पर्यटक और स्थानीय नागरिक गुजरते हैं। खुले में बह रहे सीवर के इस गंदे नजारे को देखकर न केवल उन्हें असहजता महसूस होती है, बल्कि उनकी धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है।
स्थानीय लोगों और चालकों की मुख्य मांगें:
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नाला टैपिंग का कार्य: चंद्रभागा नदी में गिर रहे खुले सीवर के पाइपों को तत्काल प्रभाव से बंद कर नाले को टैप किया जाए।
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अधिकारियों की जवाबदेही: लापरवाह और सुस्त रवैया अपनाने वाले संबंधित विभागों के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
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गंगा की निर्मलता की सुरक्षा: जनहित और गंगा हित को सर्वोपरि रखते हुए नदी को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए।

