




ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश और इसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नगर पालिका, लोनिवि (PWD) और स्थानीय प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी है। मानसून के इस सीजन में शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी रास्तों की स्थिति बेहद जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह सड़कों का डामर उखड़ जाने से अब राहगीरों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि ‘सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क’।
विशेष रूप से ऋषिकेश से लेकर तपोवन तक का पूरा मार्ग खस्ताहाल हो चुका है, जिस पर सफर करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों, यात्रियों और दर्शन के लिए आ रहे श्रद्धालुओं को रोज़ाना जान जोखिम में डालकर इन रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। आलम यह है कि मरीजों को अस्पताल ले जाते समय भी गाड़ियां इन जख्मी सड़कों पर हिचकोले खाने को मजबूर हैं।
पानी भरने से और जानलेवा हुए गहरे गड्ढे बारिश के दौरान सड़कों पर हुए गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। जलभराव के कारण वाहन चालकों—खासकर दोपहिया सवारों—को गड्ढों की गहराई का सही अंदाजा नहीं मिल पाता, जिससे आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं।
बारिश थमते ही शुरू होगा पैचवर्क: प्रशासन सड़कों की इस बदहाली और आम जनता की परेशानियों पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) व प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण डामर उखड़ा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही बारिश का दौर थमेगा, प्राथमिकता के आधार पर सड़कों की मरम्मत, सुधार और पैचवर्क का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
बहरहाल, जब तक बारिश पूरी तरह नहीं रुकती और मरम्मत कार्य शुरू नहीं होता, तब तक ऋषिकेश और तपोवन मार्ग पर चलने वाले लोगों को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।

