ऋषिकेश
तीर्थनगरी ऋषिकेश में प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘नाड़ी विज्ञान दिवस’ का भव्य समारोह धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इंद्रमणि बडोनी चौक स्थित एक स्थानीय होटल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कुसुम कंडवाल, कार्यक्रम के संयोजक व प्रसिद्ध नाड़ी रोग विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी और उपस्थित संतों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
प्राचीन पद्धति की ओर लौटने की आवश्यकता: कुसुम कंडवाल
समारोह को संबोधित करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि प्राचीन काल से चली आ रही यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धति धीरे-धीरे लोगों की स्मृतियों से ओझल होती जा रही है।
“आजकल लोग त्वरित राहत के लिए तेजी से एलोपैथिक इलाज की ओर भाग रहे हैं, जो केवल तात्कालिक आराम देता है। लेकिन यह जानकर बेहद हर्ष हुआ कि हमारी नाड़ी विज्ञान पद्धति में भी मरीजों को पूर्ण और स्थायी राहत मिलने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।” — कुसुम कंडवाल, अध्यक्ष (राज्य महिला आयोग)
जटिल बीमारियों का भी संभव है इलाज: डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी
कार्यक्रम के संयोजक नाड़ी रोग विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी ने नाड़ी चिकित्सा की बारीकियों और विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस विद्या के माध्यम से न केवल रोग की जड़ की पहचान की जा सकती है, बल्कि कई जटिल और असाध्य बीमारियों का उपचार भी सफलतापूर्वक संभव है।
लुप्त होती धरोहर को बचाने का प्रयास
कार्यक्रम के दौरान ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान और श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा:
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नाड़ी चिकित्सा हमारी एक अनमोल प्राचीन विरासत है, जो वर्तमान समय में धीरे-धीरे लुप्त होने के कगार पर है।
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डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी इस पद्धति को पुनर्जीवित करने और सहेजने के लिए निरंतर सराहनीय प्रयास कर रहे हैं।
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आमजन और विशेषकर बीमार व्यक्तियों को इस प्राकृतिक व पारंपरिक पद्धति से इलाज कराकर इसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।

